कल्पना करें… आप एक बिल्कुल शांत कमरे में बैठे हैं। आपके सामने स्क्रीन पर एक प्राचीन वाद्ययंत्र की तस्वीर है, जो सदियों से खामोश है। कोई तार नहीं, कोई लकड़ी नहीं, बस पिक्सेल। आपकी धड़कनें तेज हो जाती हैं जैसे ही आपकी उंगली कांच की स्क्रीन के करीब पहुँचती है। क्या होगा? क्या यह सिर्फ एक कांच का टुकड़ा है? जैसे ही आपकी उंगली उस ‘तस्वीर’ को छूती है, कमरे की खामोशी टूट जाती है। एक दिव्य, गूंजती हुई ध्वनि हवा में तैरने लगती है। यह जादू नहीं है, और…
